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Hyderabad हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस ने सोमवार को तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में एक साथ की गई छापेमारी के दौरान क्यूनेट/विहान डायरेक्ट सेलिंग मल्टी-लेवल मार्केटिंग घोटाले से जुड़े चार मामलों में 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हैदराबाद सिटी पुलिस के सेंट्रल क्राइम स्टेशन (सीसीएस) की 30 स्पेशल टीमों ने ये गिरफ्तारियां की हैं। इन टीमों ने तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बेंगलुरु के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ छापेमारी की।
उन्होंने बताया कि 11 महिलाएं समेत कुल 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए सभी लोग इस धोखाधड़ी वाली एमएलएम स्कीम/बिजनेस में प्रमोटरों की भर्ती और ट्रेनिंग में अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे। इनमें से ज्यादातर आरोपी आईटी कर्मचारी हैं, जिनमें कुछ पूर्व आईटी कर्मचारी भी शामिल हैं। उनके मुताबिक, यह पूरे देश में हजारों करोड़ रुपए की बड़े पैमाने पर की गई धोखाधड़ी का मामला है। इसमें विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने अवैध मनी सर्कुलेशन स्कीम को बढ़ावा दिया। यह कंपनी भारत में क्यूआई ग्रुप की खुद को फ्रेंचाइजी बताने वाली कंपनी है और क्यू नेट ब्रांड नाम से काम करती है।
विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड (क्यू नेट) के खिलाफ सीसीएस, डिटेक्टिव डिपार्टमेंट, हैदराबाद में चार मामले दर्ज किए गए हैं। विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड, जिसे पहले गोल्ड क्वेस्ट और क्वेस्ट नेट के नाम से जाना जाता था, हांगकांग की एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनी है। यह क्यूआई ग्रुप के स्वामित्व वाली कंपनी है। यह कंपनी सॉफ्टवेयर कर्मचारियों, कारोबारियों, गृहिणियों और पार्ट-टाइम नौकरी ढूंढने वालों को अपना निशाना बनाती है।
पुलिस के मुताबिक, यह ग्रुप पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर सॉफ्टवेयर कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा है। साथ ही, यह ई-कॉमर्स बिजनेस के नाम पर लोगों को लुभा रहा है और उन्हें ज्यादा रिटर्न वाले निवेश के मौके देने का वादा कर रहा है। चुने गए लोगों को हाईटेक सिटी के होटलों में ले जाया जाता था। वहां उन्हें कंपनी का नाम बताए बिना निवेश की योजना समझाई जाती थी। उन्हें बताया जाता था कि अगर वे पांच से दस लाख रुपए का निवेश करेंगे, तो उन्हें दो साल के अंदर 3 से 4 करोड़ रुपए मिलेंगे। शुरुआत में वे क्यूनेट कंपनी, एमएलएम या बाइनरी तरीके का नाम नहीं बताते हैं।
सज्जनार ने बताया कि जब किसी व्यक्ति के घर पर कुछ प्रोडक्ट पहुंचते हैं, तो कुछ मामलों में वे यह गलत जानकारी देते हैं कि ये स्कीम में बने रहने के लिए कंपनी की तरफ से दिए गए तोहफे हैं। इस तरह, वे लोगों की सहमति और जानकारी के बिना ही उनके निवेश की रकम का इस्तेमाल एमएलएम स्कीम के प्रोडक्ट खरीदने में कर लेते हैं। कमिश्नर ने बताया कि यह कंपनी कई तरह की पोंजी स्कीम, बाइनरी स्कीम, प्रोडक्ट-आधारित स्कीम, वेकेशन पैकेज वगैरह जैसी कारोबारी तरकीबें अपनाती है, जो कि गैर-कानूनी हैं। पुलिस ने अब तक इन चार मामलों में 11 पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। उन्हें लगभग 75 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इस मामले में अभी कई और पीड़ितों की जांच की जानी बाकी है। कमिश्नर ने आगे बताया कि इस धोखाधड़ी के नेटवर्क में शामिल फरार आरोपियों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
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